पंचांग · Panchang
आपका रोज़ का आध्यात्मिक कैलेंडर, अब बेहद आसान
वेदज्ञ पंचांग से आप हर दिन की ऊर्जा, शुभ-अशुभ समय और पर्वों को आसानी से और साफ़ तौर पर समझ सकते हैं। तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, त्योहार और प्रकृति की लय — सब एक ही सुंदर स्क्रीन पर।
आज का पंचांग
आज का पंचांग तैयार हो रहा है…
पंचांग हर दिन क्या बताता है
तिथि और चंद्रमा की कला
चंद्रमा की मौजूदा कला, उसका अर्थ और पूजा-पाठ, मन की स्थिति और आध्यात्मिक संतुलन के लिए उसका महत्व समझें। तिथि दिन की ऊर्जा पर असर डालती है और तय करती है कि कौन-से काम सबसे उचित हैं — व्रत से लेकर उत्सव तक, आत्म-चिंतन से लेकर कर्म तक। वेदज्ञ हर तिथि को आसान भाषा में समझाता है, ताकि आप जान सकें कि दिन कैसा रहेगा।
नक्षत्र की ऊर्जा
आज का नक्षत्र और उसके स्वभाव को देखें, ताकि दिन की सूक्ष्म ऊर्जा को बेहतर समझ सकें। 27 नक्षत्रों में से हर एक की अपनी अलग तरंग होती है, जो मन, फ़ैसलों और साधना पर असर डालती है। वेदज्ञ हर नक्षत्र के स्वामी देवता, तत्व और सामान्य मार्गदर्शन के बारे में बताता है।
शुभ और अशुभ समय
राहु काल, गुलिक काल, यमगंड और अभिजीत मुहूर्त को समय चुनने में सहायक संकेत के रूप में इस्तेमाल करें। जानें कि ज़रूरी काम कब शुरू करें, कब सावधानी रखें और सबसे शुभ समय कब शुरू होता है। हर समय-अवधि का व्यावहारिक महत्व भी समझाया गया है।
त्योहार और पर्व
महत्वपूर्ण त्योहार, व्रत की तारीख़ें और आध्यात्मिक अवसर देखें, ताकि आपकी रोज़ की साधना पारंपरिक कैलेंडर से जुड़ी रहे। वेदज्ञ आने वाले पर्वों को उनके महत्व, सुझाई गई विधियों और आध्यात्मिक अर्थ के साथ दिखाता है — ताकि आप साल की पवित्र लय से जुड़े रहें।
प्रकृति की लय
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय देखें, ताकि आप दिन की प्राकृतिक और आध्यात्मिक लय से जुड़े रहें। यही समय वैदिक दिनचर्या की नींव हैं और पूरे दिन ध्यान, प्रार्थना और साधना की गुणवत्ता पर असर डालते हैं।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पंचांग क्यों ज़रूरी है
पंचांग वैदिक कालगणना की नींव है। यह आपको चंद्र चक्रों, ग्रहों की ऊर्जा और ऋतुओं की उस लय से जोड़ता है, जिसने हज़ारों वर्षों से करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा दी है। आज के समय में यह बेहतर फ़ैसले लेने में मदद करता है — कब काम करें, कब रुकें और कब उत्सव मनाएँ।
पंचांग कैलेंडर: अक्टूबर 2026, नई दिल्ली
- कृष्ण पंचमी रोहिणी
- कृष्ण षष्ठी मृगशिरा
- कृष्ण सप्तमी आर्द्रा
- कृष्ण नवमी पुनर्वसु
- कृष्ण दशमी पुष्य
- कृष्ण एकादशी आश्लेषा एकादशी
- कृष्ण द्वादशी मघा
- कृष्ण त्रयोदशी पूर्वा फाल्गुनी
- कृष्ण चतुर्दशी उत्तरा फाल्गुनी
- अमावस्या हस्त अमावस्या
- शुक्ल प्रतिपदा चित्रा शारदीय नवरात्रि
- शुक्ल द्वितीया स्वाति
- शुक्ल तृतीया विशाखा
- शुक्ल चतुर्थी अनुराधा
- शुक्ल पंचमी ज्येष्ठा
- शुक्ल षष्ठी ज्येष्ठा
- शुक्ल सप्तमी मूल दुर्गा पूजा
- शुक्ल सप्तमी पूर्वाषाढ़ा
- शुक्ल अष्टमी उत्तराषाढ़ा दुर्गा अष्टमी
- शुक्ल नवमी श्रवण दशहरा
- शुक्ल दशमी धनिष्ठा
- शुक्ल एकादशी शतभिषा एकादशी
- शुक्ल द्वादशी पूर्वा भाद्रपद
- शुक्ल त्रयोदशी उत्तरा भाद्रपद
- शुक्ल चतुर्दशी रेवती
- पूर्णिमा अश्विनी पूर्णिमा
- कृष्ण प्रतिपदा भरणी
- कृष्ण तृतीया कृत्तिका
- कृष्ण चतुर्थी रोहिणी करवा चौथ
- कृष्ण पंचमी मृगशिरा
- कृष्ण षष्ठी आर्द्रा
सूर्योदय के समय की तिथि और नक्षत्र। त्योहारों की तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं।
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