दिवाली एक दिन का नहीं, बल्कि कई त्योहारों का सिलसिला है, जिनका अपना-अपना अर्थ है और जो मिलकर कार्तिक महीने की सबसे अंधेरी रात को रोशन करते हैं। भारत में इन्हीं दिनों के अलग-अलग नाम और अलग-अलग कथाएं हैं: अयोध्या में भगवान राम की वापसी का उत्सव मनाया जाता है, चेन्नई में परिवार भोर से पहले तेल स्नान के लिए उठते हैं, कोलकाता में रात माता काली की होती है, और अहमदाबाद में दिवाली के अगले दिन नया साल शुरू होता है। इस लेख में 2026 की सारी तारीखें एक जगह दी गई हैं, और फिर हम राज्य-दर-राज्य इस त्योहार की यात्रा करते हैं।
दिवाली 2026 एक नज़र में
साल 2026 में दिवाली और लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है। त्योहारों का यह सिलसिला शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होकर बुधवार, 11 नवंबर को भाई दूज पर पूरा होता है, और इसके बाद बिहार और पूर्वी भारत में छठ पूजा आती है। नीचे दिए गए समय नई दिल्ली के लिए IST में हैं।
| दिन | तारीख | क्या होता है |
|---|---|---|
| धनतेरस (धनत्रयोदशी) | शुक्रवार, 6 नवंबर | धन्वंतरि और लक्ष्मी की पूजा, धातु और नई चीज़ों की खरीद, शाम को यम दीप |
| काली चौदस | शनिवार, 7 नवंबर | कृष्ण चतुर्दशी की रात, खासकर गुजरात में |
| नरक चतुर्दशी | रविवार, 8 नवंबर (भोर) | भोर से पहले तेल स्नान; तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में दीपावली का मुख्य दिन; महाराष्ट्र में अभ्यंग स्नान |
| दिवाली / लक्ष्मी पूजा | रविवार, 8 नवंबर (शाम) | प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा, दीप और उत्सव |
| काली पूजा | रविवार, 8 नवंबर (रात) | बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में आधी रात को माता काली की पूजा |
| अमावस्या जारी | सोमवार, 9 नवंबर | दोपहर 12:32 तक अमावस्या; ज़्यादातर जगह कोई मुख्य त्योहार नहीं, कुछ लोग स्नान-दान करते हैं |
| गोवर्धन पूजा / अन्नकूट, बेसतु वरस, बलि प्रतिपदा | मंगलवार, 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा और अन्नकूट; गुजराती नववर्ष; महाराष्ट्र में दिवाली पाडवा और कर्नाटक में बलि पाड्यमी |
| भाई दूज / भाऊ बीज / भाई फोंटा | बुधवार, 11 नवंबर | बहनें भाइयों की खुशहाली की कामना करती हैं |
| छठ पूजा | शुक्रवार, 13 से सोमवार, 16 नवंबर | बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सूर्य उपासना के चार दिन |
पांचों दिन विस्तार से
धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर
त्रयोदशी 6 नवंबर को सुबह 10:31 पर शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10:48 पर खत्म होती है, इसलिए धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर की शाम को मनाई जाएगी। यह दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि को समर्पित है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। परिवार घरों की सफाई करते हैं, दरवाज़े पर रंगोली बनाते हैं और कुछ नया खरीदते हैं, अक्सर बर्तन, चांदी या सोना। शाम को बहुत से घरों में परिवार की लंबी उम्र की कामना से दक्षिण दिशा की ओर यम के लिए दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। ज़्यादा जानकारी हमारे धनतेरस पेज पर पढ़ें।
काली चौदस और नरक चतुर्दशी: 7 और 8 नवंबर
चतुर्दशी 7 नवंबर, सुबह 10:48 से 8 नवंबर, सुबह 11:28 तक है। इसकी रात, यानी शनिवार 7 नवंबर, गुजरात में काली चौदस के रूप में मनाई जाती है। इसकी भोर, यानी रविवार 8 नवंबर, नरक चतुर्दशी है, जिस दिन माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर को हराया था। लोग सूर्योदय से पहले उठते हैं, तेल और उबटन लगाकर स्नान करते हैं। उत्तर भारत के बड़े हिस्से में चतुर्दशी को रूप चौदस या छोटी दिवाली भी कहा जाता है।
2026 में एक खास संयोग है: नरक चतुर्दशी की सुबह और लक्ष्मी पूजा की शाम एक ही दिन, रविवार 8 नवंबर को पड़ रही हैं। यानी दक्षिण भारत के परिवार जिस दिन भोर में दीपावली का स्नान करेंगे, उसी दिन शाम को उत्तर भारत के परिवार लक्ष्मी पूजा करेंगे। स्थानीय पंचांगों में इन दिनों के नाम थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने परिवार का पंचांग मानें। हमारा नरक चतुर्दशी पेज भी देखें।
दिवाली और लक्ष्मी पूजा: रविवार, 8 नवंबर
अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:28 पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:32 पर खत्म होती है। लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है, यानी सूर्यास्त के ठीक बाद का वह समय जब अमावस्या चल रही हो। नई दिल्ली में 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:31 से 7:55 तक है। सटीक मुहूर्त हर शहर में अलग होता है, क्योंकि यह स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर करता है। परिवार लक्ष्मी और गणेश की पूजा करते हैं, अक्सर कुबेर के साथ, दीयों की कतारें जलाते हैं, मिठाई बांटते हैं और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं। बहुत से व्यापारी नए बही-खातों की पूजा करते हैं। ज़्यादा जानकारी हमारे दिवाली पेज पर पढ़ें।
सोमवार, 9 नवंबर
अमावस्या दोपहर 12:32 तक रहती है। ज़्यादातर जगहों पर इस दिन कोई मुख्य त्योहार नहीं होता, हालांकि कुछ लोग अमावस्या की सुबह पवित्र स्नान और दान (स्नान-दान) करते हैं।
गोवर्धन पूजा और नया साल: मंगलवार, 10 नवंबर
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को उत्तर भारत में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाया जाता है, यह याद करते हुए कि भगवान कृष्ण ने ब्रज के लोगों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। गोबर या अन्न से छोटा पर्वत बनाकर उसकी पूजा की जाती है, और मंदिरों में भगवान को कई व्यंजनों का "पर्वत" भोग लगाया जाता है। इसी दिन गुजराती नववर्ष बेसतु वरस है, और महाराष्ट्र व कर्नाटक में बलि प्रतिपदा या दिवाली पाडवा। हमारा गोवर्धन पूजा पेज देखें।
भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर
भाई दूज पर बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और उनकी खुशहाली की कामना करती हैं, और भाई बदले में उपहार देते हैं। यह दिन यमुना द्वारा अपने भाई यम के स्वागत की कथा से जुड़ा है। महाराष्ट्र में इसे भाऊ बीज और बंगाल में भाई फोंटा कहते हैं। ज़्यादा जानकारी हमारे भाई दूज पेज पर पढ़ें।
हर राज्य में दिवाली कैसे मनाई जाती है
उत्तर भारत: उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और आसपास
उत्तर भारत में दिवाली सबसे बढ़कर भगवान राम के अयोध्या लौटने का उत्सव है, जब वे चौदह साल के वनवास और रावण पर विजय के बाद घर लौटे थे। अयोध्यावासियों की तरह लोग उनके स्वागत में दीप जलाते हैं। अयोध्या का दीपोत्सव, जिसमें सरयू के घाटों पर लाखों दीये जलाए जाते हैं, देश के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले उत्सवों में से एक बन गया है। घरों की सफाई और रंगाई होती है, हफ्तों पहले से बाज़ार भरे रहते हैं, और शाम को लक्ष्मी-गणेश पूजा के बाद दीये, मिठाइयां और मेल-मिलाप होता है। ब्रज में, यानी मथुरा और वृंदावन के आसपास, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का खास महत्व है।
गुजरात
गुजरात में दिवाली पारंपरिक विक्रम संवत कैलेंडर में साल का आखिरी दिन होती है। चतुर्दशी की रात काली चौदस मनाई जाती है, जिसमें रक्षा के लिए महाकाली और हनुमान जी की पूजा होती है। दिवाली पर व्यापारी चोपड़ा पूजन करते हैं, यानी नए बही-खातों की पूजा। अगले दिन बेसतु वरस (2026 में मंगलवार, 10 नवंबर) नया साल होता है: लोग नए कपड़े पहनते हैं, मंदिर जाते हैं और "साल मुबारक" व "नूतन वर्षाभिनंदन" कहकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं। बहुत से व्यापार कुछ दिन बाद लाभ पंचमी पर फिर से खुलते हैं।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की दिवाली वसु बारस से शुरू होती है, जब गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी पर परिवार भोर से पहले अभ्यंग स्नान करते हैं, जिसमें सुगंधित तेल और उटणे लगाया जाता है, और कई घरों में नरकासुर पर जीत के प्रतीक के रूप में कड़वा कारीट फल पैर से फोड़ा जाता है। घर फराळ से भर जाते हैं, यानी चकली, करंजी, शंकरपाली और लड्डू जैसे दिवाली के पकवान, और बच्चे अक्सर मिट्टी के छोटे किले बनाते हैं। दिवाली पाडवा पर पत्नियां पति की आरती उतारती हैं और उपहार पाती हैं, और त्योहार भाऊ बीज के साथ पूरा होता है।
तमिलनाडु और दक्षिण भारत
तमिलनाडु में, और मोटे तौर पर पूरे दक्षिण भारत में, दीपावली नरक चतुर्दशी की भोर में मनाई जाती है, जो 2026 में रविवार, 8 नवंबर को है। इसके केंद्र में भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय की कथा है। परिवार बहुत सुबह उठकर तेल स्नान करते हैं, जिसे अक्सर गंगा स्नानम कहा जाता है, नए कपड़े पहनते हैं, पटाखे चलाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। दावत वाले दिन पाचन के लिए जड़ी-बूटियों से बना दीपावली मरुंदु (लेहियम) खाया जाता है। नवविवाहित जोड़ों की पहली दीपावली, जिसे तलै दीपावली कहते हैं, दुल्हन के मायके में उपहारों और नए कपड़ों के साथ मनाई जाती है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नरकासुर वध में सत्यभामा की भूमिका को खास तौर पर याद किया जाता है।
कर्नाटक
कर्नाटक में नरक चतुर्दशी की शुरुआत तेल स्नान से होती है, और अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा की जाती है। तीसरा दिन, बलि पाड्यमी (मंगलवार, 10 नवंबर), राजा बलि को समर्पित है, वह उदार राजा जिन्हें भगवान विष्णु ने वामन रूप में पाताल भेजा था और जिनके बारे में माना जाता है कि वे इस दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। गांवों में दरवाज़े पर बलि की आकृतियां बनाई जाती हैं, और मवेशियों को सजाकर उनकी पूजा होती है।
केरल
ओणम या विशु की तुलना में केरल में दिवाली अपेक्षाकृत सादगी से मनाई जाती है। जहां मनाई जाती है, वहां मुख्य ध्यान नरक चतुर्दशी पर होता है, जिसमें सुबह स्नान, दीये और पटाखे होते हैं, और राज्य में रहने वाले तमिल, कोंकणी और उत्तर भारतीय समुदायों में यह त्योहार ज़्यादा धूमधाम से मनता है।
पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा
बंगाल और असम में अमावस्या की रात काली पूजा को समर्पित है, और 2026 में यह रविवार, 8 नवंबर की रात है। घरों और सामुदायिक पंडालों में पूरी रात माता काली की पूजा होती है। इससे पहले की शाम भूत चतुर्दशी होती है, जब परिवार पूर्वजों की राह रोशन करने के लिए चौदह दीये जलाते हैं और चौदह तरह के साग से बना चोद्दो शाक खाते हैं। ज़्यादा जानकारी हमारे काली पूजा पेज पर पढ़ें।
ओडिशा में परिवार दिवाली की शाम कौंरिया काठी की रस्म निभाते हैं, जिसमें जूट की लकड़ियों का गट्ठर जलाकर पूर्वजों को पुकारा जाता है और उनसे कहा जाता है कि वे अंधेरे में आएं और रोशनी में स्वर्ग लौट जाएं। ओडिशा और त्रिपुरा में भी काली पूजा बड़े पैमाने पर मनाई जाती है।
गोवा
गोवा में त्योहार का केंद्र नरक चतुर्दशी है। इससे पहले के दिनों में मोहल्ले नरकासुर के बड़े-बड़े पुतले बनाते हैं, और नरक चतुर्दशी की भोर से पहले उन्हें घुमाकर जलाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। कई गांवों और कस्बों में पुतलों की प्रतियोगिताएं भी होती हैं।
पंजाब
पंजाब में दिवाली के साथ बंदी छोड़ दिवस भी मनाया जाता है, यानी वह दिन जब गुरु हरगोबिंद साहिब ग्वालियर के किले से वहां कैद 52 राजाओं के साथ रिहा हुए थे। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर हज़ारों दीयों और रोशनी से जगमगाता है, और शाम आतिशबाज़ी के साथ पूरी होती है। पंजाब के हिंदू परिवार भी इसी रात लक्ष्मी पूजा करते हैं।
दूसरे धर्मों में दिवाली
- जैन समुदाय दिवाली को पावापुरी में भगवान महावीर के निर्वाण के दिन के रूप में मनाता है। ज्ञान के प्रकाश के प्रतीक के रूप में दीप जलाए जाते हैं, और बहुत से जैनों के लिए अगले दिन नया साल शुरू होता है।
- सिख समुदाय बंदी छोड़ दिवस, यानी "मुक्ति का दिन", गुरुद्वारों में अरदास, लंगर और रोशनी के साथ मनाता है।
दिवाली के बाद छठ पूजा
दिवाली के छह दिन बाद बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा मनाई जाती है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की उपासना होती है। यह हिंदू कैलेंडर के सबसे अनुशासित व्रतों में से एक है।
| रस्म | तारीख | क्या होता है |
|---|---|---|
| नहाय-खाय | शुक्रवार, 13 नवंबर | पवित्र स्नान और सादा सात्विक भोजन |
| खरना | शनिवार, 14 नवंबर | दिन भर व्रत, शाम को गुड़ की खीर और रोटी से पारण |
| संध्या अर्घ्य | रविवार, 15 नवंबर | नदी या तालाब पर डूबते सूर्य को अर्घ्य |
| उषा अर्घ्य | सोमवार, 16 नवंबर | उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत का समापन |
ज़्यादा जानकारी हमारे छठ पूजा पेज पर पढ़ें।
सुरक्षा और पर्यावरण के लिए सुझाव
- दीये और मोमबत्तियां पर्दों, दुपट्टों, कागज़ की सजावट और ऐसी जगहों से दूर रखें जहां बच्चे उन्हें गिरा सकें।
- दीये और पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनें, और पास में पानी या रेत की बाल्टी रखें।
- तेज़ पटाखों और धुएं से पालतू जानवरों, पक्षियों, बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों और सांस की तकलीफ वाले लोगों को काफी परेशानी हो सकती है। पालतू जानवरों को घर के अंदर किसी शांत कमरे में रखें, और हवा में धुआं हो तो खिड़कियां बंद रखें।
- पटाखों के नियम, जैसे ग्रीन पटाखे और पटाखे चलाने का तय समय, हर शहर में अलग होते हैं। खरीदने से पहले अपने स्थानीय प्रशासन के दिशानिर्देश देख लें।
- मिट्टी के दीये, रंगोली के लिए प्राकृतिक रंग और फूल या दोबारा इस्तेमाल होने वाली सजावट चुनें, और हो सके तो मिठाई दोबारा इस्तेमाल होने वाले डिब्बों में बांटें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में दिवाली 8 नवंबर को क्यों है?
लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या को तब की जाती है जब प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के ठीक बाद के समय में अमावस्या चल रही हो। 2026 में अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:28 पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:32 पर खत्म होती है, इसलिए सिर्फ 8 नवंबर की शाम को ही सूर्यास्त के समय अमावस्या रहती है।
दक्षिण भारत में दीपावली उत्तर भारत से अलग दिन क्यों मनाई जाती है?
दक्षिण में दीपावली नरक चतुर्दशी पर केंद्रित है और भोर में मनाई जाती है, जबकि उत्तर में मुख्य ध्यान अमावस्या की शाम लक्ष्मी पूजा पर होता है। आम तौर पर ये लगातार दो दिनों में पड़ते हैं। 2026 में दोनों रविवार, 8 नवंबर को हैं, एक भोर में और एक शाम को।
मेरे शहर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है, जो स्थानीय सूर्यास्त से शुरू होता है। नई दिल्ली में 8 नवंबर को यह शाम 5:31 से 7:55 तक है। सूर्यास्त जगह के साथ बदलता है, इसलिए हर शहर में यह समय थोड़ा खिसक जाता है। अपने शहर का समय ज़रूर देखें।
2026 में काली पूजा कब है?
काली पूजा अमावस्या की आधी रात को की जाती है। 2026 में यह रविवार, 8 नवंबर की रात है।
तिथियों का समय, सूर्यास्त और प्रदोष काल एक शहर से दूसरे शहर में थोड़ा बदल जाते हैं। अपने शहर के लिए दिवाली का समय आप Vedagya ऐप में या हमारे दैनिक पंचांग पर देख सकते हैं, और परिवार के साथ आराम से पांचों दिनों की योजना बना सकते हैं।
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