लोहड़ी के बारे में
लोहड़ी एक लोक त्योहार है, जो मकर संक्रांति से पहले की रात मनाया जाता है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू क्षेत्र में इसकी सबसे ज़्यादा रौनक रहती है। यह कड़ाके की सर्दी के ढलने का संकेत है और गन्ने की फसल तथा खेतों में लहलहाती रबी की फसल के लिए आभार जताने का दिन है। शाम ढलते ही परिवार और पड़ोसी एक बड़े अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं और अग्निदेव के प्रति कृतज्ञता के रूप में तिल, गुड़, मूंगफली, पॉपकॉर्न और रेवड़ी आग में अर्पित करते हैं।
अलाव के आसपास गाए जाने वाले गीतों में अक्सर दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है। पंजाब के इस लोकनायक को लड़कियों की रक्षा करने और सम्मान के साथ उनकी शादी करवाने के लिए जाना जाता है। बच्चे घर-घर जाकर ये गीत गाते हैं और बदले में उन्हें मिठाइयाँ मिलती हैं। जिन घरों में पहली लोहड़ी होती है, जैसे शादी या बच्चे के जन्म के बाद, वहाँ इसका खास महत्व होता है। रिश्तेदार मिलकर आशीर्वाद देते हैं, भांगड़ा और गिद्धा करते हैं और सरसों का साग व मक्की की रोटी का आनंद लेते हैं।
कैसे मनाया जाता है
- शाम को सामूहिक अलाव जलाना और उसकी परिक्रमा करना
- आग में तिल, गुड़, मूंगफली, पॉपकॉर्न और रेवड़ी अर्पित करना
- दुल्ला भट्टी से जुड़े गीतों सहित लोहड़ी के लोकगीत गाना
- नवविवाहितों या नवजात शिशु की पहली लोहड़ी परिवार के साथ मनाना
- गजक, रेवड़ी और साग व मक्की की रोटी का त्योहारी भोजन बाँटना
लोहड़ी: पिछले और आने वाले वर्षों की तारीखें
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2024 | रविवार, 14 जनवरी 2024 | बीत गया |
| 2025 | सोमवार, 13 जनवरी 2025 | बीत गया |
| 2026 | मंगलवार, 13 जनवरी 2026 | बीत गया |
| 2027 | गुरुवार, 14 जनवरी 2027 | अगला |
| 2028 | शुक्रवार, 14 जनवरी 2028 | आने वाला |
| 2029 | शनिवार, 13 जनवरी 2029 | आने वाला |
| 2030 | रविवार, 13 जनवरी 2030 | आने वाला |
तारीखें नई दिल्ली के पंचांग से निकाली गई हैं। कुछ क्षेत्रों में त्योहार एक दिन पहले या बाद में मनाया जा सकता है।
पूरे भारत में
मुख्य रूप से यहाँ मनाया जाता है: पंजाब चंडीगढ़ दिल्ली
एक ही त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग नाम और रीति से मनाया जाता है। जहाँ कोई क्षेत्र इसे अलग दिन मनाता है, वहाँ उसकी गणना की गई तारीख दी गई है।
पंजाब
लोहड़ी
शाम को परिवार अलाव जलाकर उसकी परिक्रमा करते हैं और तिल, रेवड़ी, गजक, मूंगफली व मक्के की खील अर्पित करते हुए दुल्ला भट्टी के लोकगीत गाते हैं। नवजात शिशु या नवविवाहित जोड़े की पहली लोहड़ी खास धूमधाम से मनाई जाती है।
हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश
लोहड़ी
मोहल्ले के लोग साझा अलाव के पास भांगड़ा, गिद्धा और सर्दियों की मिठाइयों के साथ जुटते हैं। यह कड़ाके की ठंड के अंत और रबी की फसल के आगमन का उत्सव है।
जम्मू
लोहड़ी
बच्चे घर-घर जाकर गीत गाते और उपहार इकट्ठा करते हैं, और मोर जैसे सजे ढांचों के साथ होने वाला छज्जा नृत्य यहाँ की खास पहचान है।
सिंधी समुदाय
लाल लोई
सिंधी परिवार संक्रांति की पूर्व संध्या को लाल लोई के रूप में मनाते हैं, अलाव जलाकर बच्चों और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
पंजाब
माघी
लोहड़ी के अगले दिन माघी यानी मकर संक्रांति होती है। लोग पवित्र स्नान करते हैं और सिख श्री मुक्तसर साहिब में चालीस मुक्तों को याद करने जुटते हैं।
तारीख: शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
भोगी
दक्षिण भारत में भी संक्रांति की पूर्व संध्या पर अग्नि जलाकर सर्दियों की फसल का स्वागत होता है। भोगी पर पुरानी चीज़ें जलाकर नए की शुरुआत की जाती है।
तारीख: गुरुवार, 14 जनवरी 2027
लोहड़ी मुख्य रूप से उत्तर भारत का त्योहार है; दूसरे क्षेत्रों में यही मौसम मकर संक्रांति, पोंगल या बिहू के रूप में मनाया जाता है।
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