मकर संक्रांति के बारे में
मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य मकर राशि (निरयन मकर) में प्रवेश करते हैं। ज़्यादातर हिंदू त्योहारों के विपरीत यह चंद्र पंचांग के बजाय सौर पंचांग पर आधारित है, इसीलिए हर साल यह लगभग एक ही समय पर आता है। परंपरा के अनुसार इसी से उत्तरायण, यानी सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा की शुरुआत मानी जाती है, और इसे बढ़ते प्रकाश, नई फसल और शुभ शुरुआत का समय माना जाता है।
पूरे भारत में यह त्योहार कई रूपों में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू, पंजाब में माघी मनाई जाती है, और गुजरात व राजस्थान में उत्तरायण पर आसमान पतंगों से भर जाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे अक्सर खिचड़ी कहा जाता है, जबकि महाराष्ट्र में लोग "तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला" कहकर एक-दूसरे को तिलगुल देते हैं, यानी मीठा बोलने का आग्रह करते हैं। बहुत से लोग गंगा जैसी नदियों में पवित्र स्नान करते हैं, खासकर प्रयागराज और गंगासागर में। इस दिन अनाज, गर्म कपड़े या तिल की मिठाइयों का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
कैसे मनाया जाता है
- सुबह जल्दी स्नान करना और संभव हो तो नदी में पवित्र डुबकी लगाना
- सूर्यदेव को जल अर्पित कर अर्घ्य देना और प्रार्थना करना
- तिल और गुड़ की मिठाइयाँ बनाना और बाँटना
- ज़रूरतमंदों को अनाज, खिचड़ी, कंबल या गर्म कपड़े दान करना
- गुजरात, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में परिवार के साथ पतंग उड़ाना
मकर संक्रांति: पिछले और आने वाले वर्षों की तारीखें
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2024 | सोमवार, 15 जनवरी 2024 | बीत गया |
| 2025 | मंगलवार, 14 जनवरी 2025 | बीत गया |
| 2026 | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | बीत गया |
| 2027 | शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 | अगला |
| 2028 | शनिवार, 15 जनवरी 2028 | आने वाला |
| 2029 | रविवार, 14 जनवरी 2029 | आने वाला |
| 2030 | सोमवार, 14 जनवरी 2030 | आने वाला |
तारीखें नई दिल्ली के पंचांग से निकाली गई हैं। कुछ क्षेत्रों में त्योहार एक दिन पहले या बाद में मनाया जा सकता है।
पूरे भारत में
पूरे भारत में मनाया जाता है
एक ही त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग नाम और रीति से मनाया जाता है। जहाँ कोई क्षेत्र इसे अलग दिन मनाता है, वहाँ उसकी गणना की गई तारीख दी गई है।
तमिलनाडु, पुडुचेरी
पोंगल
संक्रांति को थाई पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जब फसल के लिए सूर्य को धन्यवाद देते हुए दूध और गुड़ में चावल उबाला जाता है। तमिल पंचांग अपने नियम से दिन तय करता है।
तारीख: शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
असम
माघ बिहू (भोगाली बिहू)
फसल का उत्सव उरुका से शुरू होता है, जब बांस की झोपड़ियों (भेलाघर) में सामूहिक भोज होता है, फिर मेजी का अलाव जलाया जाता है। असमिया पंचांग अपने नियम से दिन तय करता है, इसलिए एक दिन का अंतर हो सकता है।
गुजरात
उत्तरायण
सुबह से शाम तक छतों पर पतंगबाज़ी होती है और परिवार उंधियू व चिक्की का आनंद लेते हैं। अहमदाबाद में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव होता है।
उत्तर प्रदेश, बिहार
खिचड़ी
लोग गंगा स्नान करते हैं, चावल, दाल और तिल का दान करते हैं और दही-चूड़ा व खिचड़ी खाते हैं। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालु खिचड़ी चढ़ाते हैं।
पंजाब
माघी
लोहड़ी के अगले दिन माघी पर पवित्र स्नान होता है और श्री मुक्तसर साहिब में बड़ा मेला लगता है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
तिळगूळ, एळ्ळु-बेल्ला, संक्रांति
महाराष्ट्र में लोग "तिळगूळ घ्या, गोड गोड बोला" कहकर तिल-गुड़ बांटते हैं, कर्नाटक में एळ्ळु-बेल्ला का आदान-प्रदान होता है, और तेलुगु राज्यों में रंगोली व पतंगों के साथ तीन दिन का उत्सव होता है।
पूरे भारत में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे पोंगल, माघ बिहू, माघी, उत्तरायण और खिचड़ी।
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