पोंगल के बारे में
पोंगल, जिसे थई पोंगल भी कहते हैं, तमिलनाडु का सबसे बड़ा फसल उत्सव है। यह तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और तमिल महीना थई शुरू होता है। इसका नाम उस व्यंजन से आया है जो इस त्योहार का केंद्र है: नए चावल को दूध और गुड़ के साथ मिट्टी या पीतल के बर्तन में पकाया जाता है, और जब वह उफनकर बाहर आता है तो सब मिलकर "पोंगलो पोंगल" कहते हैं। यह उफान समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है। यह त्योहार सूर्यदेव, धरती और खेतों में मेहनत करने वाले पशुओं को धन्यवाद देने का अवसर है।
यह उत्सव चार दिनों तक चलता है। भोगी के दिन घरों की सफ़ाई होती है और पुरानी, बेकार चीज़ों का अलाव जलाया जाता है। मुख्य दिन थई पोंगल पर दरवाज़े पर कोलम बनाया जाता है, गन्ने और हल्दी के पौधे सजाए जाते हैं और खुले में सूर्य की ओर मुख करके पोंगल पकाया जाता है। मट्टू पोंगल पर गाय-बैलों को नहलाकर सजाया जाता है और प्यार से खिलाया जाता है। काणुम पोंगल रिश्तेदारों से मिलने और परिवार के साथ घूमने का दिन है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में यही समय संक्रांति के रूप में अपनी परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
कैसे मनाया जाता है
- घर की सफ़ाई करना और भोगी पर पुरानी चीज़ों का अलाव जलाना
- दरवाज़े पर कोलम बनाना और गन्ने से सजावट करना
- नए बर्तन में मीठा पोंगल पकाना और उसे उफनने देना
- मट्टू पोंगल पर पशुओं को नहलाना, सजाना और खिलाना
- काणुम पोंगल पर परिवार से मिलना और घूमने जाना
पोंगल: पिछले और आने वाले वर्षों की तारीखें
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2024 | सोमवार, 15 जनवरी 2024 | बीत गया |
| 2025 | मंगलवार, 14 जनवरी 2025 | बीत गया |
| 2026 | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | बीत गया |
| 2027 | शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 | अगला |
| 2028 | शनिवार, 15 जनवरी 2028 | आने वाला |
| 2029 | रविवार, 14 जनवरी 2029 | आने वाला |
| 2030 | सोमवार, 14 जनवरी 2030 | आने वाला |
तारीखें नई दिल्ली के पंचांग से निकाली गई हैं। कुछ क्षेत्रों में त्योहार एक दिन पहले या बाद में मनाया जा सकता है।
पूरे भारत में
मुख्य रूप से यहाँ मनाया जाता है: तमिलनाडु आंध्र प्रदेश तेलंगाना कर्नाटक
एक ही त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग नाम और रीति से मनाया जाता है। जहाँ कोई क्षेत्र इसे अलग दिन मनाता है, वहाँ उसकी गणना की गई तारीख दी गई है।
तमिलनाडु
भोगी
उत्सव भोगी से शुरू होता है, जब घरों की सफाई होती है और भोर में पुरानी चीज़ें अलाव में जलाकर नई शुरुआत का स्वागत किया जाता है।
तारीख: गुरुवार, 14 जनवरी 2027
तमिलनाडु, पुडुचेरी
थाई पोंगल
मुख्य दिन खुले में नए बर्तन में दूध और गुड़ के साथ चावल पकाया जाता है, और उफान आते ही सब "पोंगलो पोंगल" पुकारते हुए फसल के लिए सूर्य को धन्यवाद देते हैं।
तमिलनाडु
मट्टू पोंगल
अगले दिन पशुधन का सम्मान होता है; गायों-बैलों को नहलाकर, रंगकर और माला पहनाकर सजाया जाता है। मदुरै और आसपास के गांवों में यही जल्लीकट्टू का मौसम है।
तमिलनाडु
काणुम पोंगल
अंतिम दिन रिश्तेदारों से मिलने, परिवार के साथ घूमने और बड़ों का आशीर्वाद लेने का होता है।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
संक्रांति
तेलुगु राज्य भोगी, संक्रांति और कनुमा मनाते हैं, जिसमें मुग्गुलु (रंगोली), नए कपड़े, पतंगबाज़ी और कनुमा पर पशुओं का सम्मान होता है।
तारीख: शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
कर्नाटक
मकर संक्रांति
परिवार एळ्ळु-बेल्ला (तिल, गुड़ और नारियल) बांटते हैं, और गांवों में सजे हुए पशुओं को आग के ऊपर से पार कराने की रस्म किच्चु हायिसुवुदु होती है।
तारीख: शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
पोंगल उसी मौसम में आता है जब देश के दूसरे हिस्सों में मकर संक्रांति, लोहड़ी और माघ बिहू मनाए जाते हैं।
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