राम नवमी के बारे में
राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान राम के जन्म का उत्सव है। रामायण के अनुसार राम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था, और परंपरा में उनके जन्म का समय पुनर्वसु नक्षत्र में मध्याह्न माना जाता है। इसलिए बहुत से भक्त मुख्य पूजा मध्याह्न काल में करते हैं, जब बाल राम की छोटी प्रतिमा को पालने में रखकर धीरे-धीरे झुलाया जाता है।
राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में याद किया जाता है, जो सत्य, कर्तव्य और करुणा के आदर्श हैं। सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ उनकी कथा आज भी पूरे भारत में रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा है। इस दिन मंदिरों में रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण का पाठ होता है, और शोभायात्राओं में राम की प्रतिमाएँ सड़कों पर निकाली जाती हैं। अयोध्या में श्रद्धालु सरयू में स्नान करने पहुँचते हैं। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में, खासकर तेलंगाना के भद्राचलम में, यह दिन सीता राम कल्याणम, यानी दिव्य विवाह के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र नवरात्रि का समापन भी है, और बहुत से लोग नवमी पर अपना नौ दिन का व्रत खोलते हैं।
कैसे मनाया जाता है
- मध्याह्न काल में राम की पूजा करना और बाल राम का पालना झुलाना
- रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण का पाठ करना या सुनना
- व्रत रखना और पानकम, कोसंबरी या सादा प्रसाद अर्पित करना
- मंदिर के भजन, कीर्तन और शोभायात्राओं में शामिल होना
- कुछ परिवारों में कन्या पूजन के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन करना
राम नवमी: पिछले और आने वाले वर्षों की तारीखें
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2024 | बुधवार, 17 अप्रैल 2024 | बीत गया |
| 2025 | रविवार, 6 अप्रैल 2025 | बीत गया |
| 2026 | गुरुवार, 26 मार्च 2026 | बीत गया |
| 2027 | गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 | अगला |
| 2028 | सोमवार, 3 अप्रैल 2028 | आने वाला |
| 2029 | रविवार, 22 अप्रैल 2029 | आने वाला |
| 2030 | शुक्रवार, 12 अप्रैल 2030 | आने वाला |
तारीखें नई दिल्ली के पंचांग से निकाली गई हैं। कुछ क्षेत्रों में त्योहार एक दिन पहले या बाद में मनाया जा सकता है।
पूरे भारत में
पूरे भारत में मनाया जाता है
एक ही त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग नाम और रीति से मनाया जाता है। जहाँ कोई क्षेत्र इसे अलग दिन मनाता है, वहाँ उसकी गणना की गई तारीख दी गई है।
उत्तर प्रदेश (अयोध्या)
राम नवमी
श्रद्धालु सरयू में स्नान करते हैं और भगवान राम के जन्म की घड़ी में राम मंदिर में उमड़ते हैं, जिसके बाद भजन-कीर्तन होते हैं।
तेलंगाना (भद्राचलम)
सीता राम कल्याणम
भद्राचलम में सीता और राम का विवाह बड़ी श्रद्धा से संपन्न होता है, और परंपरा के अनुसार राज्य की ओर से मोती और रेशमी वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
कर्नाटक
राम नवमी
घरों और मंदिरों में पानक (गुड़ का शरबत) और कोसंबरी का भोग लगता है, और बेंगलुरु में राम के सम्मान में लंबे शास्त्रीय संगीत समारोह होते हैं।
तमिलनाडु
श्री राम नवमी
भक्त राम भजन गाते और रामायण पाठ करते हैं, और पानकम, नीर मोर (मसालेदार छाछ) व सुंडल अर्पित करते हैं।
बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल
राम नवमी
कस्बों में भगवा ध्वजों के साथ बड़ी शोभायात्राएँ निकलती हैं, और पटना के महावीर मंदिर में भारी भीड़ होती है।
दक्षिण भारत में यह दिन अक्सर सीता राम कल्याणम के रूप में मनाया जाता है; कुछ समुदाय नौ दिनों तक उत्सव मनाते हैं।
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